Thursday, October 29, 2015

जवाब चाहिये



हर साल हम रावण जलाते हैं, बड़ी बड़ी बाते लिखते हैं कि ये दिन बुराई पर सच्चाई की जीत होती है, पुराने समय का तो पता नहीं बस पढ़ा है, लेकिन आज के समय में क्या सच में ऐसा होता बै, क्या किसी ने बुराई को हारते देखा है ? सच सामने जरूर आता है लेकिन तब तक झूठ अपनी जिंदगी के मजे ले चुका होता है और सच थका हारा, कमजोर और बूढ़ा हो चुका होता है........  ऐसा क्यों
हम क्या सिखायें बच्चो को कि सच बोलो और पिसते रहो या झूठ बोलो और जिंदगी के मजे लो...... जवाब चाहिये सबसे







2 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (30.10.2015) को "आलस्य और सफलता "(चर्चा अंक-2145) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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